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हिमाचल में वित्तीय आपातकाल जैसे हालात – ₹45,000 करोड़ कर्ज, ₹15,000 करोड़ अदायगी और घटता बजट चिंता का विषय : संदीपनी

➤ भाजपा ने हिमाचल सरकार पर लगाया वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप
➤ ₹45,000 करोड़ कर्ज और ₹15,000 करोड़ अदायगी को बताया बड़ा संकट
➤ बजट में कटौती और वेतन स्थगन को बताया “वित्तीय आपातकाल जैसे हालात”


शिमला में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस सरकार के बजट पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति गंभीर संकट में है और हालात “वित्तीय आपातकाल जैसे” बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि इस बार प्रदेश का बजट घटाकर लगभग ₹58,514 करोड़ से ₹54,928 करोड़ कर दिया गया है, यानी करीब ₹3,500 से ₹4,000 करोड़ की कटौती की गई है। उनके अनुसार, इससे विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ेगा।

संदीपनी भारद्वाज ने आरोप लगाया कि सरकार को कर्मचारियों के वेतन का 3% से 50% तक हिस्सा 6 महीनों के लिए स्थगित करना पड़ा, जो वित्तीय दबाव का संकेत है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में सरकार ने करीब ₹45,000 करोड़ का कर्ज लिया, जिससे कुल कर्ज ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि करीब ₹15,000 करोड़ की अदायगी का दबाव है, लेकिन सरकार के पास इसे चुकाने के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है। उन्होंने सरकार की आर्थिक नीति को “कर्जा लेकर घी पीने” जैसा बताते हुए इसे वित्तीय कुप्रबंधन करार दिया।

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार जनता को भ्रमित करने के लिए दिखावटी फैसले ले रही है। उन्होंने बोर्ड-निगम चेयरमैन के मानदेय बढ़ाने और फिर कटौती के फैसले को गुमराह करने वाला कदम बताया।

पंचायतों को लेकर उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग के तहत मिले फंड को वापस लेने की प्रक्रिया लोकतंत्र के खिलाफ है। उनका कहना है कि यदि फंड खर्च नहीं हुआ तो जिम्मेदारी अधिकारियों की है, न कि चुने हुए प्रतिनिधियों की।

किसानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर दूध के दाम बढ़ाने की बात कर रही है, जबकि दूसरी ओर खरीद पर सीमाएं लगाई जा रही हैं। किसानों को भुगतान में देरी का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि करीब ₹120 करोड़ से अधिक की देनदारी लंबित है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत मिले करीब ₹3,300 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को भी सही ढंग से लागू नहीं किया गया, जिससे फंड वापसी की स्थिति बन रही है।

अंत में उन्होंने कहा कि बजट में पारदर्शिता की कमी है और यह बजट कर्मचारी, किसान और युवा वर्ग के हितों के खिलाफ है। उनके मुताबिक, यह दस्तावेज प्रदेश को आर्थिक अस्थिरता की ओर ले जाने वाला है।